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गाँव से स्कूल छीनना,भविष्य में खतरे की घण्टी, कटघरे मे सरकार की स्कूल मर्जर पॉलिसी

गाँव से स्कूल छीननाभविष्य में खतरे की घण्टी

गाँव से स्कूल छीनना,भविष्य में खतरे की घण्टी, कटघरे मे सरकार की स्कूल मर्जर पॉलिसी

कम नामांकन बता विद्यालयों को बंद करना शिक्षा के अधिकार का हनन

वीरेंद्र कुमार राव, बहराइच। परिषदीय विद्यालयों में कम छात्र संख्या को आधार मानकर विद्यालयों के किए जा रहे मर्जर के इस आदेश से सबसे ज्यादा गांव के गरीब घरों की बेटियां प्रभावित हो रही है जिनका विद्यालय बंद कर उन्हें कई किलोमीटर दूर दूसरे है।इससे बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार को भी छीना जा रहा है। जबकि प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करना उसका मौलिक अधिकार भी है। जनचर्चा है कि अभिभावकों ने सरकार के इस तुगलकी आदेश से बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए चिंता जताई है। इस व्यवस्था के संबंध में सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण यादव कहते हैं कि गांव में स्कूलों की मौजूदगी केवल शिक्षा की सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की रीढ़ होती है। श्री यादव ने यह भी कहा कि मर्जर गांव की आत्मा का विसर्जन से कम कतई नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति का उद्देश्य गिनती घटाना नहीं बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास के साथ हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना होना चाहिए स्कूल हटाना नहीं। जनचर्चा यह भी है कि संसाधन और शिक्षको की नियुक्ति ही समाधान है। पेयरिंग का तात्कालिक लाभ हो सकता है लेकिन इसका दीर्घकालिक नुकसान बालिकाओं की शिक्षा, सामाजिक एकता और गांव की आत्मनिर्भरता पर गहरी चोट करेगा। यदि स्कूल बंद हुए तो आने वाले समय में गांव केवल नक्शे में बचेंगे बिना आत्मा, बिना जीवन के।

स्कूलों को मर्ज करने के पीछे विभाग का तर्क

जरवल। जिले मे शिक्षा विभाग के आला अधिकारियो का तर्क है कि अगर छोटे स्कूलों का बड़े स्कूलों में मर्जर होगा तो उस स्थिति में छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल पाएंगी उन्हें भी दूसरों की तरफ अच्छी शिक्षा मिलेगी।

” वर्ष 2017-18 में बच्चों की संख्या-16311114, वर्ष 2018-19 मे बच्चों की संख्या-163142, वर्ष  2019-20 में बच्चों की संख्या-137638, वर्ष 2020-21 में बच्चों की संख्या-137068, वर्ष 2021-22 में बच्चों की संख्या-137024 हो गई इसी तरह 2022-23 में बच्चों की संख्या-137003 पर पहुंच गई, वर्ष 2023-24 में बच्चों की संख्या-137102 पर जा पहुंचे।

यह उत्तर प्रदेश के सरकारी आंकड़े हैं वर्ष 2017 के बाद लगभग 26 000 विद्यालय बंद कर दिए जा चुके हैं “

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